अनाथ बच्चे का पत्र भगवान के नाम
हे परमपिता परमेश्वर,
आपको शत-शत नमन है !
मैं अनाथ बालक मृत्यु लोक से स्वर्गलोक में बैठे आपको यह पत्र लिख रहा हूँ। मुझ पर कृपा करके इस पत्र को पढ़ने का कष्ट अवश्य कीजिएगा।
मैं एक अनाथ बालक हूँ। मैं अबोध, अज्ञानी नासमाझ व अनजान हूँ। आप दुनिया के मालिक हैं। आप सर्वज्ञ हैं। आप कर्ता धर्ता हर्ता हैं।
भगवन, मैं बहुत अभागा हूं। मैं भाग्यहीन हूँ। मेरे पैदा होते ही मेरी मां मर गई और पाँच साल बाद मेरे पिता भी स्वर्गवास हो गए। मुझ पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मैं इस दुनिया में अकेला हो गया। मेरे आगे पीछे कोई नहीं बचा। ले देकर एक मेरी मौसी है जिन्होंने मुझे पाल-पोस कर बड़ा किया।
अब मैं कुछ होशियार हो गया हूँ, लेकिन अपनी गरीबी और माली हालत के कारण बहुत दुखी हूँ।
मुझे कुछ आपसे कहना है। मुझे कुछ आपसे पूछना है। आप किसी को भी बेसहारा और अनाथ क्यों बनाते हैं ? आप किसी को भी गरीब, लाचार व बेबस क्यों बनाते हैं ?
जब आपने इस धरती पर हमें पैदा ही किया है तो हमें सहाराहीन व नाथहीन क्यों कर देते हैं ?
यदि आप ही हम सब के मालिक हैं तो आप हमारा सहारा क्यों नहीं बनते हैं ?
आप यदि सहारा नहीं बन सकते तो किसी और को हमारा सहारा बनाकर क्यों नहीं भेजते हैं ?
हम बेसहारे, बेबस, लाचार, मजबूर लोग मुफलिसी में अपनी जिंदगी बसर करने के लिए विवश हैं।
आप दुनिया के अमीर लोगों, धनी लोगों व बड़े लोगों के दिलों में दया, करुणा और प्रेम क्यों नहीं भरते हैं कि वे हमारी मदद करके हमारा सहारा बनें और हमारी जिंदगी को सुखमय बनाएं और हमें इस लोक में एक उत्तम जीवन बसर करने का मौका दें।
भगवन थोड़ा कहा, अधिक समझना। भूल चूक माफ करना।और मेरी बातों पर ध्यान देकर आप तुरन्त करवाई कीजिएगा।
अब पत्र बंद करता हूँ ।
धन्यवाद!
आपका अबोध बालक -
"दीनू"
बिहार, भारत (मृत्युलोक)
दिनेश एल० "जैहिंद"
07/12/2020


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